बढ़ती उम्र के साथ योनि में हो जाती हैं ये 5 समस्याएं-दैनिक बुद्ध का संदेश संवाददाता

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दैनिक बुद्ध का संदेश संवाददाता

कई बार उम्र बढ़ने के साथ-साथ पीरियड्स में ब्‍लीडिंग काफी गाढ़ी होती है, लेकिन ऐसा हर बार और हर किसी के साथ नहीं होता है।

योनि की समस्या


लेकिन जैसे-जैसे उम्र बढ़ती जाती है और मेनोपॉज फेज चल रहा होता है, उस दौरान योनि को स्‍वस्‍थ रखना बेहद आवश्‍यक होता है। बढ़ती उम्र के साथ योनि की समस्याएं भी बढ़ने लगती है।
वजिनल ड्रायनेस
वजिना में ड्रायनेस मेनोपॉज का एक सामान्य लक्षण है और आमतौर पर अधिकतर महिलाओं को मेनोपॉज के बाद महसूस होता है। एक सर्वे के अनुसार 40 से 84 के बीच लगभग आधी महिलाएं इसकी शिकायत करती हैं। यह समस्या एस्ट्रोजेन की कमी के कारण होती है, जिससे युवावस्था की तुलना में इसकी फ्लेक्सिबिलिटी और नमी में कमी आ जाती है।
यूरीनरी
योनि शुष्क होने से जलन महसूस होती है। इसमें पेल्विक ऑरगेन का सपोर्ट कम पड़ जाता है। पेशाब बार-बार होना, कंट्रोल न कर पाना, संक्रमण होना इत्यादि इसके अन्य लक्षण हैं।

प्रोलैप्स
शरीर के भीतर का कोई अंग या हिस्सा, जब अपनी जगह से खिसक कर कहीं दूसरी जगह चला जाता है तो उसे अंग उतरना यानी प्रोलैप्स कहते हैं। बुढ़ापे पर अक्सर महिलाओं का गर्भाशय अपने स्थान से खिसक कर योनि मार्ग में आ जाता है या योनि मुख से बाहर निकल जाता है।
शिथिल हो जाना
उम्र के बढ़ने के साथ शारीर भी कमजोर होने लगता है। मांसपेशी ढीली पद जाती है।शरीर के कमजोर एवं शिथिल होने के कारण स्त्रियों का योनि मार्ग ढीला, पोला और विस्तीर्ण हो जाता है।

Portrait of young woman relaxing on bed

योनि संक्रमण
कई बार औरतों को योनि में खुजली होने लगती है और वह इस पर एंटी-फंगल क्रीम लगा लेती है, लेकिन हर बार ऐसा नहीं करना चाहिए। योनि में दो प्रकार के संक्रमण होते है – बैक्‍टीरियल वेजीनोसिस (बीवी), इस संक्रमण में योनि में बैक्‍टीरिया हो जाते है। दूसरा ट्रिकोमोनिसाईसिस होता है जिसमें बहुत खुजली होती है। इनका इलाज अवश्‍य करवाना चाहिए, ताकि आप पूर्णत: स्‍वस्‍थ हो सकें।

नियमित परीक्षण न करवाना
अमेरिकन कॉलेज ऑफ ऑब्‍स्‍ट्रिशियन और गायनोकोलॉजिस्‍ट के द्वारा हाल ही में जारी निर्देशों के अनुसार, 30 वर्ष तक अपना परीक्षण करवाती हैं लेकिन उसके बाद ढीली पड़ जाती है और पेप परीक्षण नहीं करवाती है। ऐसा न करें। हर साल डॉक्‍टर के पास रेगुलर चेकअप के लिए जाएं। इस दौरान ब्रेस्‍ट और योनि परीक्षण करवाएं।

इन उपायों से करें बचाव
प्रोटीन व पानी की मात्रा अधिक लेने से शरीर चुस्त रहता है. अधिक व्यायाम, योग, नियमित तेज टहलना चाहिए. खाने में फल एवं सब्जियों का उपयोग अधिक करना चाहिए. धूम्रपान, अल्कोहल और चाय-कॉफी से बचना चाहिए. विटामिन, मिनरल, कैल्सियम की मात्र नियमित लें। दूध, छेना एवं दही नियमित रूप से लेते रहें। हड्डियों की दुर्बलता के लिए कैल्सियम, विटामिन डी का सेवन करें।

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